Famous Indian scientist pro. Veerbal sahni
new photo
प्रो. बीरबल साहनी एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक थे, जिन्होंने भारतवर्ष में वनस्पति विज्ञान की एक नयी शाखा- पुरावनस्पति विज्ञान (पेलियोबॉटनी) के अध्ययन तथा शोध कार्य की शुरुआत की। उनकी प्रेरणा तथा सतत् प्रयासों के फलस्वरूप लखनऊ (उ.प्र.) में 1 अप्रैल, 1949 को विश्व प्रसिद्ध बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान की स्थापना तत्कालीन प्रधानमन्त्रपण्डित जवाहरलाल नेहरू ने की।
प्रो. साहनी का जन्म 14 नवम्बर, 1891 में शाहपुर जिले के एक कस्बे में हुआ था। उनको प्रारम्भिक शिक्षा लाहौर के मिशन स्कूल, सेण्ट्रल मॉडल स्कूल तथा राजकीय इण्टर कालेज में हुई। सन् 1911 में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएट) की उपाधि प्राप्त की। प्रो. साहनी ने 1914 में प्रो. ए. सी. सिवार्ड के कुशल निर्देशन में शोध कार्य शुरू किया। जीवाश्म पौधों के अन्वेषण कार्यों के लिए उन्हें 1919 में लन्दन विश्वविद्यालय ने डी. एस-सी. की उपाधि प्रदान की। उनके सराहनीय शोध कार्यों के लिए 1929 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने उन्हें पुन: डी. एस-सी. की उपाधि से विभूषित किया।
प्रो. साहनी ने 1907 से 1911 तक हिमालय के पर्वतीय पौधों का वृहद संकलन व अध्ययन किया। उन्होंने पादप जीवाश्मों (प्लाण्ट फॉसिल्स) को एकत्र करके उनका विस्तृत अध्ययन भी किया। 1915 में प्रो. साहनी अन्तर्राष्ट्रीय वानस्पतिक कांग्रेस स्टॉकहोम के अवैतनिक अध्यक्ष के रूप में चुने गये। वर्ष 1921 में प्रो. साहनी, वनस्पति विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रथम प्रोफेसर नियुक्त हुए थे। उन्होंने स्नातकोत्तर तथा ऑनर्स कक्षाओं की स्थापना की। 1930 से 1935 तक वे भारतीय विज्ञान कांग्रेस के सभापति रहे। 1933 में प्रो. साहनी को लखनऊ विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय (फैकल्टी ऑफ साइंस) का डीन नियुक्त किया गया। 1936 में उन्हें रॉयल सोसायटी ऑफ लन्दन का सदस्य चुना गया।
प्रो. साहनी के कुशल निर्देशन में 16 विद्यार्थियों को पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त हुई। वैज्ञानिक अभिरुचि के अतिरिक्त उन्हें संगीत से अगाध प्रेम था। वह सितार तथा वायलिन के कुशल वादक थे।
प्रो. साहनी के सतत् परिश्रम (efforts) से लखनऊ (उ. प्र.) में पुरावनस्पति विज्ञान
संस्थान (बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोबॉटनी) की स्थापना तो हो गयी, किन्तु
स्थापना के मात्र एक सप्ताह बाद, 10 अप्रैल, 1949 में प्रो. साहनी का असामयिक निधन हो
गया।
(iii) भू-वैज्ञानिक समय सारणी (Geological Time Scale) भू-वैज्ञानिकों द्वारा पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक इतिहास (Geological history) के वर्गीकरण
में 2 units समय (time) तथा स्तर (strata) का प्रयोग किया गया है। पृथ्वी की ऐतिहासिक घटनाओं के वर्णन में उपरोक्त दोनों इकाइयों के equivalents का प्रयोग synonym के रूप
में किया जा सकता है।

PK MASTI 421https://youtu.be/SIGOXMQMUaw
ReplyDeleteV good 👍👍👍😊
ReplyDelete